तेजस्वी बोले इसलिए बिहार के गरीबों को नहीं मिल रहा अनाज? पासवान के बयान के बाद तेजस्वी का नीतीश पर जोरदार हमला

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लॉकडाउन के दौरान गरीबों को सरकार की तरफ से मदद दिए जाने की भरपूर कोशिशें हो रही हैं लेकिन बिहार में इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव नीतीश सरकार पर इसे लेकर लगातार आरोप लगा रहे हैं और अब केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की बातों ने आग में घी का काम किया है। पासवान की कही बातों का हवाला देकर तेजस्वी यादव ने कहा है कि गोदामों में खाद्यान्न सड़ रहा है उधर गरीब भूखे मर रहे हैं क्योंकि उन्हें राशन बांटा ही नहीं जा रहा है। उन्होंने नीतीश सरकार पर अनाज की जमाखोरी का संगीन आरोप भी लगा दिया है।

तेजस्वी यादव ने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की बात को ही पकड़ कर नीतीश सरकार पर नए सिरे से हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री श्री रामविलास पासवान भी हमारे द्वारा उठाई गयी बिहार में राशन और खाद्य वितरण में हो रही समस्याओं और विफलताओं को स्वीकार करते है।

राम विलास पासवान ने गुरुवार को ट्वीट करके कहा था कि खाद्य सुरक्षा क़ानून के तहत बिहार में जितने लाभार्थी होने चाहिए उससे काफ़ी कम हैं। पासवान के मुताबिक़ इस क़ानून के तहत बिहार में 8.71 करोड़ लाभार्थी होने चाहिए जबकि हैं 8.57 करोड़ लोग। इसका मतलब ये हुआ कि राज्य में क़रीब 14 लाख ग़रीब ऐसे हैं जिन्हें इस कानून के तहत मिलने वाले सस्ते अनाज का फ़ायदा नहीं मिल रहा है। पासवान ने 17 अपैल को इस बारे में बिहार के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी से इस मामले पर बात की थी और अब वह सीधे नीतीश कुमार से इस मामले में दखल चाहते हैं। पासवान ने एक तरह से नीतीश कुमार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।

पासवान की बातों का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा है कि पासवानजी के दावे अनुसार बिहार सरकार खाद्यान्न का वितरण नहीं कर पा रही है तो इसका स्पष्ट अर्थ हुआ कि बिहार के मुख्यमंत्री वितरण की बजाय स्वेच्छा से खाद्यान्न का स्टॉक कर रहे हैं क्योंकि नीतीश कुमार जी का सदा से दृढ़ विश्वास के साथ यह मत रहा है कि लोग तत्काल राहत को याद नहीं करते हैं और कुछ दिनों बाद जनता सब भूल जाती है जैसा की जनादेश अपमान के समय भी हुआ था।

तेजस्वी का ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अपने आजमाए और परखे हुए फॉर्मूले को लागू कर रहे है। सरकार ज़रूरतमंदो को अभी वितरण इसलिए नहीं कर रही क्योंकि सारा बचा हुआ अनाज चुनावों से पहले वितरित करेंगे ताकि उसका चुनावी फ़ायदा मिल सके। महामारी के दौर में लोग भूखे मर रहे है और सरकार राजनीतिक जालसाज़ी और नफ़ा-नुक़सान में लिप्त है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि बिहार सरकार में पारदर्शिता है तो केंद्रीय मंत्री के आरोप का जवाब दें।

तेजस्वी ने दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के मजदूरों के मसले को भी उठाया है और कहा है कि 17 लाख अप्रवासी बिहारी जहाँ फँसे है वहाँ की सरकारें उन्हें भेजना चाहती है लेकिन बिहार सरकार उन्हें लाना नहीं चाहती। क्या राज्य ने उन्हें मरने-मारने के लिए छोड़ दिया है? क्या यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा नहीं है? उन्होंने सवाल किया है कि नीतीश जी के सांसद विशेष VIP पास लेकर दिल्ली से बिहार पहुँच सकते है लेकिन मज़दूर नहीं। एक लोकतांत्रिक सरकार को आम और ख़ास में फ़र्क़ नहीं करना चाहिए।

रामविलास पासवान और तेजस्वी यादव ने जो बातें कही हैं वह बेहद गंभीर हैं। खाद्य सुरक्षा कानून के लाभ हर एक पात्र को मिलना चाहिए। अगर कहीं समस्या है तो उसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए। नीतीश सरकार को इस ओर तुरंत कदम उठाना चाहिए।