तेजस्वी बोले ‘नीतीश सरकार वायरस से भी बड़ी आपदा’!

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बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर नीतीश सरकार के राहत इंतजामों और क्वारंटाइन सेंटरों में खराब व्यवस्था को लेकर जोरदार हमला बोला है। तेजस्वी का कहना है कि बिहार सरकार के राहत और सहायता प्रदान करने के सभी लंबे-लंबे दावे उजागर हो चुके है। क्वारंटाइन सेंटरों में लोगों को सूखा चूरा, सूखा भात, नमक और मिर्च खाने के लिए दिया जा रहा है। सरकार के कुप्रबंधन के वीडियो वायरल हो रहे है। लाखों श्रमिक पैदल चल रहे है। रास्ते में मर रहे है।

तेजस्वी ने सरकार के उस दावे को भी गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि प्रवासी मजदूरों को क्वारंटाइन सेंटरों में रहने की अवधि पूरी होने के बाद ट्रेन का किराया और अतिरिक्त 500 रुपया दिया जा रहा है। तेजस्वी ने कहा है कि बाहर से आने वाले श्रमवीरों से पूछिए कि उनमें से कितनों को 1000₹ मिला है। प्रतिदिन सभी खुलकर कह रहे है उन्हें सहायता राशि प्राप्त नहीं हुई है। पोर्टल पर पंजीकरण के बावजूद ट्रेनों द्वारा नहीं भेजा गया।

तेजस्वी ने बेहद तीखे शब्दों में कहा है कि क्वारंटाइन सेंटरों में कोई व्यवस्था नहीं है ऊपर से कोई अगर शिकायत कर दे तो उसे धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि सरकार हर दूसरे दिन नियम बदल रही है। पहले बोलते है यात्रा फ़्री कराएंगे, फिर शर्त लगाते है कि क्वारंटाइन के बाद किराया और 500₹ देंगे। बदहाल सेंटरों पर मीडिया का प्रवेश वर्जित कर दिया जाता है और अब कहते है हमारी ख़ामियाँ दुनिया को मत बताओ अन्यथा पैसा नहीं देंगे। जैसे इनके पुरखों के ख़ज़ाने से पैसा दे रहे है। तेजस्वी का आरोप है कि इनकी कोई मंशा ठीक नहीं है, ये बस चुनावी प्रबंधन में लगे हुए है।

तेजस्वी ने आपदा प्रबंधन विभाग में भारी भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित करते हुए कहा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी, इस विपदा की घड़ी में अप्रवासियों के लिए आफ़त और भ्रष्टाचार की गंगोत्री बन चुके अपने आपदा प्रबंधन विभाग को बोलिए कि भ्रष्टाचार कम और सेवा भाव अधिक रखे। यह विभाग ग़रीबों को राहत कम लानत ज़्यादा दे रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग आपके पसंदीदा बाबुओं के लिए संपदा सृजन विभाग बन चुका है। भ्रष्टाचार और सरकारी ख़ज़ाने की लूट पर अंकुश लगाइए।

तेजस्वी की माने तो बिहार के लोग एक समय में दो आपदाओं से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना तो सबसे बड़ी आपदा है ही लेकिन बिहार सरकार तो खुद वायरस से भी बड़ी आपदा साबित हो रही है। मुख्यमंत्री द्वारा इस स्थिति को सही तरीक़े से नहीं संभालने के कारण सरकार पर जनता का विश्वास खत्म हो गया है। जनप्रतिनिधियों की कहीं कोई पूछ नहीं, चंद भ्रष्ट पसंदीदा अधिकारियों के भरोसे पूरी सरकार चल रही है।