दिल्ली में अरविंद केजरीवाल का मास्टर स्ट्रोक

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवालों को दी है बड़ी सौगात। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली बिल माफ कर दिया है, इससे एक दिन पहले ही केजरीवाल सरकार ने बिजली कनेक्शन पर फिक्स चार्ज में भारी कमी की थी। भले ही विपक्ष की तरफ से इसे चुनावी कदम कहा जा रहा हो अरविंद केजरीवाल का यह कदम दिल्ली के आम आदमी और उन उपभोक्ताओं के लिए बहुत बड़ी राहत है जो बिजली की कम खपत करते हैं। केजरीवाल का यह ऐसा मास्टर स्ट्रोक है कि मुख्य विपक्षी दल भाजपा के पास इसका कोई जवाब नहीं दिख रहा है।

केजरीवाल सरकार ने गुरुवार को बिजली पर जनता को जो राहत दी उसके मुताबिक दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर अब कोई बिल नहीं आएगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि दिल्ली सरकार महीने में 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को पूरी सब्सिडी देगी। अगर 201 से 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करते हैं तो सरकार इस पर 50% सब्सिडी देगी। बिजली का खर्च 400 यूनिट से ज्यादा होगा, तो कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। यह फैसला पहली अगस्त से ही लागू हो गया है।

इससे पहले केजरीवाल सरकार ने बिजली कनेक्शन पर फिक्स चार्ज में भी भारी कमी की थी। 15 किलोवाट तक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिक्स चार्ज में प्रति किलोवाट 75 रुपये से लेकर 105 रुपये तक की कमी की गई। आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली में अब सभी राज्यों और सभी शहरों से सस्ती बिजली है वह भी पूरे चौबीस घंटे। यह ईमानदार सरकार चुनने का परिणाम है।

दिल्ली में विधानसभा चुनावों से लगभग 6 महीने पहले केजरीवाल सरकार का यह बहुत बड़ा कदम है। इस फैसले ने भाजपा को भी बैकफुट पर ला दिया है। सीधा जनता से जुड़ा हुआ मामला है इसीलिए भाजपा इसका विरोध तो कर ही नहीं सकती, इसीलिए वह अब इससे भी ज्यादा देने की बात कह रही है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस मामले पर कहा कि ‘अरविंद केजरीवाल ने तो कुछ नहीं माफ किया है, भाजपा जिस स्तर पर सोच रही है उसमें दिल्ली के हर बिजली उपभोक्ता को ध्यान में रखते हुए और बड़ी राहत देगी। भाजपा इससे बहुत ज्यादा राहत देना चाहती है’। हालांकि उन्होंने खुलासा नहीं किया यह राहत किस तरह की होगी।

बताते चलें कि इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं को मेट्रो ट्रेन में मुफ्त सफर और अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की बात कही थी। दिल्ली की जनता के लिए यह सभी मुद्दे सीधे असर डालने वाले हैं और ये आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अरविंद केजरीवाल के मास्टर स्ट्रोक्स हैं। केजरीवाल के लिए अब विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए मौका भी आखिरी ही है, वह इस वक्त जितना अच्छा खेलेंगे उसी का परिणाम उन्हें 2020 की शुरूआत में होने वाले विधानसभा चुनावों में मिलेगा।