दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर फिर एबीवीपी का कब्जा, एनएसयूआई एक सीट ही जीत सकी

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दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव पर पूरे देश की नजरें रहती हैं क्योंकि इस चुनाव से दिल्ली के युवाओं के मूड का पता चलता है। कई बार तो इसे दिल्ली का मिनी इलेक्शन तक कहा जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में पूरी दिल्ली में फैले इससे संबद्ध कॉलेजों के छात्र-छात्राएं भी हिस्सा लेते हैं इसीलिए इस चुनाव से पूरी दिल्ली के युवाओं की रायशुमारी हो जाती है। बहरहाल इस बार भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने परचम लहराया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर जीत मिली है। वहीं कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई के उम्मीदवार ने सचिव पद पर कब्जा जमाया है। पिछले साल यानी 2018 में भी नतीजे लगभग ऐसे ही थे, पिछले साल भी एबीवीपी को तीन सीटें हासिल हुई थीं, जबकि एनएसयूआई ने एक सीट जीती।

एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए अग्रसेन कॉलेज के अक्षित दहिया को उम्मीदवार बनाया था। एनएसयूआई ने छात्रा चेतना त्यागी को प्रत्याशी बनाया था। वामपंथी छात्र संगठन आइसा से दामिनी काइन चुनावी समर में थीं। अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के अक्षित दहिया (विजेता) रहे, उन्हें 29685 वोट मिले। एनएसयूआई की चेतना त्यागी को 10646 वोट मिले। आइसा की दामिनी को 5886 वोट मिले जबकि 5495 वोट नोटा पर गए।

उपाध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी के प्रदीप (विजेता) को 19858 वोट, एनएसयूआई के अंकित को 11284 वोट और आइसा के आफताब को 8217 और नोटा पर 7879 वोट पड़े।

सचिव पद एनएसयूआई के खाते में गया। एनएसयूआई के उम्मीदवार आशीष लांबा (विजेता) को 20934 वोट, एबीवीपी की योगित राठी 18881 और आइसा के विकास को 6804 मिले। नोटा पर 6507 वोट दिए गए।

संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी की शिवांगी (विजेता) को 17234 वोट मिले, एनएसयूआई के अभिषेक ने उन्हें अच्छी टक्कर दी, उन्हें 14320 मिले। आइसा की चेतना को 10876 वोट मिले, नोटा पर 7695 वोट दिए गए।