नीतीश सरकार के लिए मुसीबत बना कोटा में फंसे बिहार के छात्रों का मुद्दा, तेजस्वी बोले क्या गरीबों के बच्चे ही फंसे रहेंगे?

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राजस्थान के कोटा में कोचिंग पढ़ने गए बिहार के हजारों छात्रों को वापस लाने के मसले पर नीतीश सरकार की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। सरकार एक साथ इतने छात्रों को वापस नहीं लाने के अपने फैसले पर कायम है वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार सरकार पर हमलावर हैं।

उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर सरकार बिहार के बच्चों को नहीं ला सकती तो उन्हें ही विशेष अनुमति दी जाए, वह बच्चों को लाएंगे। तेजस्वी ने नीतीश पर ताजा हमला यह कहते हुए किया है कि नीतीश सरकार ने सत्ताधारी दल के एक और रसूखदार को पास जारी कर दिया है ताकि वह अपनी बेटी को वापस ला सके, लेकिन सरकार को आम लोगों के बच्चों की कोई चिंता नहीं है।
तेजस्वी ने कहा है कि ‘ सत्ताधारी दल के एक और रसूखदार नेता ने पहुँच का इस्तेमाल कर अपनी बेटी को कोटा से लाने का 11 अप्रैल को विशेष पास निर्गत कराया। ये अनेक मंत्रियों के चेहते है। सिर्फ़ सामान्य और आम घरों के साधारण बच्चें ही फँसे रहेंगे बाक़ी को CM विशेष छूट देते रहेंगे’।


तेजस्वी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान को आधार बना कर भी नीतीश कुमार पर हमले की धार और तेज कर दी है। दरअसल अशोक गहलोत ने कहा है कि यूपी के बाद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने इस पर सहमति दे दी है। जल्द ही इन राज्यों के छात्र अपने घर के लिए रवाना होंगे।


तेजस्वी ने कहा है कि सभी राज्य अपने छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं में सम्मिलित है लेकिन बिहार ही अकेला ऐसा अभागा राज्य बचा है जहाँ की सरकार अहंकारवश किसी के भी भविष्य, चिंता, सुरक्षा, भावना और सुझाव को नहीं सुन रही है। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश जी विपक्ष को भी ऐसा करने की अनुमति नहीं दे रहे है।


तेजस्वी ने सवाल किया है कि ‘क्या बाहर सिर्फ़ सामान्य और आम घरों के साधारण बच्चें ही फँसे रहेंगे और बाक़ी को CM विशेष छूट देते रहेंगे? सरकार की यह दोहरी नीति और रवैया कब तक चलेगा’?


सिर्फ तेजस्वी ही नहीं एक वक्त नीतीश कुमार के खासमखास रहे चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी नीतीश के खिलाफ इस मामले को लेकर मोर्चा खोला हुआ है। भाजपा विधायक अनिल सिंह को कोटा जाने-आने के लिए विशेष जारी किए जाने को लेकर प्रशांत किशोर ने नीतीश से सवाल किया कि ‘कोटा में फंसे बिहार के सैकड़ों बच्चों की मदद की अपील को नीतीश कुमार ने यह कह कर खारिज कर दिया था कि ऐसा करना ‘लॉकडाउन की मर्यादा’ के खिलाफ होगा। अब उन्हीं की सरकार ने भाजपा के एक विधायक के बेटे को कोटा से लाने की विशेष अनुमति दे दी है। नीतीश जी, अब आपकी मर्यादा क्या कहती है?’


बिहार सरकार लॉकडाउन के नियमों का हवाला भले दे रही है लेकिन उसकी मजबूरी यह है कि मजदूरों के मामले पर कन्नी काट चुकी सरकार छात्रों की वापसी की इजाजत कैसे दे और सबसे बड़ी मजबूरी ये है कि एक साथ हज़ारों की संख्या में अगर छात्र आना शुरू कर देंगे तो उनका मेडिकल टेस्ट कैसा होगा क्योंकि कोटा में छात्रों में भी करोना का वायरस पाया गया है और कई छात्र संक्रमित हैं, ऐसे में मात्र बुखार नापकर अंदाजा लगाना उनके घर वालों को भी जोखिम में डालना है।