पिता के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां को लिखा भावुक पत्र

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मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के पिता, आनंद सिंह बिष्‍ट का निधन हो गया है। दिल्‍ली के ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में सोमवार सुबह उन्‍होंने अंतिम सांस ली। यूपी के एडिशनल चीफ सेक्रटरी (होम) अवनीश अवस्थी ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता का आज सुबह 10 बजकर 44 मिनट पर स्वर्गवास हो गया है’।

जब मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के पिता के निधन की खबर उन्हें दी गई उस वक्‍त वह लखनऊ में अपनी कोर टीम के साथ लॉकडाउन में ढील और आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा कर रहे थे। बताया जाता है कि मीटिंग के बीच उन्‍हें यह दुखद समाचार दिया गया, लेकिन वह विचलित नहीं हुए और बैठक पूरी करने के बाद ही उठे। उन्‍होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोटा से लौटे बच्‍चों का होम क्‍वारंटीन में रहना सुनिश्चित कराया जाए। इसके साथ ही उनके मोबाइल में Aarogya Setu ऐप डाउनलोड कराने के बाद ही उन्‍हें घर भेजा जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिता के निधन की खबर के बाद अपनी मां को एक भावुक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि उन्हें अपने पिता की मृत्यु का दुख है। वह उन्हें अंतिम बार देखना भी चाहते थे लेकिन वैश्विक महामारी के चलते वह ऐसा नहीं कर सके। उन्होंने कहा है कि अंतिम क्षणों में उन्हें पिता के दर्शकों की हार्दिक इच्छा थी लेकिन महामारी कोरोना के खिलाफ लड़ाई के अपने कर्तव्यबोध की वजह से नहीं जा पाए। कोरोना को हराने की रणनीति में लगे होने से वह 21 अप्रैल को पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं जा पाएंगे। उन्होंने पिता को विनम्र श्रद्धांजलि दी और कहा है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद वह जाएंगे।

मुख्यमंत्री के पिता स्वर्गीय आनंद सिंह बिष्‍ट का इलाज एम्‍स के गैस्‍ट्रो डिपार्टमेंट में चल रहा था। वह 89 वर्ष के थे। डॉक्‍टरों के मुताबिक उन्‍हें किडनी और लिवर से जुड़ी समस्‍याएं थी। वह एम्स के आईसीयू में भर्ती थे और उनका डायलिसिस भी हो रहा था। रविवार रात बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के संगठन महासचिव बीएल संतोष उन्हें देखने पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री के पिता आनंद सिंह बिष्‍ट फॉरेस्‍ट रेंजर थे और 1991 में रिटायर होने के बाद उत्तराखंड के यमकेश्‍वर के पंचूर गांव में रहते आए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुरूआती शिक्षा के बाद परिवार को त्‍याग कर गोरखपुर में महंत अवेद्यनाथ के पास चले गए थे। महंत अवेद्यनाथ के महापरिनिर्वाण के बाद योगी आदित्‍यनाथ को गोरक्षपीठ का प्रमुख बनाया गया था।