बाबू सिंह कुशवाहा बने जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष, पहला निशाना मायावती पर

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यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को जन अधिकार पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। वह अभी तक पार्टी के संरक्षक थे और अध्यक्ष पद अजय सैनी के पास था लेकिन लखनऊ में हुए पार्टी के पहले राष्ट्रीय अधिववेशन में बाबू सिंह कुशवाहा को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। इस अधिवेशन में पार्टी के देश भर से आए कार्यकर्ता जुटे और पुष्प वर्षा से बाबू सिंह कुशवाहा का स्वागत किया।

जन अधिकार पार्टी के अधिवेशन में अध्यक्ष चुने जाने के बाद बाबू सिंह कुशवाहा ने कहा कि पिछड़ों, दलितों और वंचितों को हक दिलवाने के लिए उन्होंने कांशीराम जी के साथ संघर्ष शुरू किया था जो बसपा के बाद आज भी जन अधिकार पार्टी के रूप में चल रहा है। उन्होंने कहा कि भले ही बसपा रास्ते से भटक गई हो लेकिन जन अधिकार पार्टी सदैव बहुजनों के लिए संघर्ष करती रहेगी।

बताते चलें कि बाबू सिंह कुशवाहा का सियासी सफर बसपा से ही शुरू हुआ था। वह 27 साल की उम्र में ही बसपा से जुड़ गए थे। एक वक्त वह कांशीराम और मायावती के करीबी और भरोसेमंद थे और बसपा में उनका कद तब बसपा में ही रहे स्वामी प्रसाद मौर्य और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे नेताओं के बराबर का था। बाद में यह सभी नेता किसी ना किसी वजह से बसपा से अलग हो गए।

बाबू सिंह कुशवाहा ने करीब तीन साल पहले जन अधिकार पार्टी का गठन किया। इस पार्टी ने यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव को लड़ा और फिर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा। बाबू सिंह कुशवाहा की कुशवाहा-मौर्य जातियों में अच्छी पैठ है और चुनाव में उनकी पार्टी भले ही सीटें न जीत पाई लेकिन कई सीटों पर अच्छे वोट हासिल किए।