मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा ने दिखाया ऐसा कमाल का संतुलन कि दूसरे दलों के उड़ गए होश

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार में जिस तरह से क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का संतुलन किया है उसने विपक्षी और अन्य छोटे दलों के लिए काफी मुश्किल खड़ी हो गई है। इस संतुलन के जरिए सरकार और संगठन को और मजबूती मिली है। भाजपा ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने वाले चेहरों को बाहर करके और अपना दल जैसे सहयोगी को मंत्रालय में जगह न देकर यह साफ संकेत भी दे दिया है कि वह दबाव में नहीं आने वाली।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब नई टीम के साथ उपचुनावों और पंचायत चुनावों में भाजपा की जीत का फिर से परचम फहराने को तैयार हैं। योगी कैबिनेट में अब 56 सदस्यों में से 27 अगड़ी जातियों के, 21 पिछड़े, सात अनुसूचित जाति के और एक मुस्लिम मंत्री शामिल हैं। इस सोशल इंजीनियरिंग के जरिए समाज के हर वर्ग को अपना बनाने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही जिन जातियों को को मौका नहीं मिल पाया है उन्हें संगठन और मोर्चों में जगह दिए जाने की तैयारी है।

बुधवार को योगी कैबिनेट के जिन 23 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई उनमें 6 ब्राह्मण, 2 क्षत्रिय, तीन वैश्य, दो कुर्मी, दो जाट, एक गुर्जर, एक पाल, एक कश्यप,एक राजभर, एक लोध और तीन अनुसूचित जाति के हैं। मंत्रिमंडल में शामिल किए गए 18 चेहरों में से पश्चिमी उत्तर से 6 हैं। इस तरह से पश्चिमी यूपी से योगी कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या अब 11 से बढ़ कर 17 हो गई है।

इस संतुलन ने सपा,बसपा, आरएलडी, सुभासपा जैसे विपक्षी दलों और अपना दल जैसे सहयोगी दल के लिए भी मुश्किल खड़ी कर दी है। पिछड़े व अनुसूचित जातियों से भागीदारी बढ़ने से सपा,बसपा, आरएलडी, सुभासपा का गणित बिगड़ रहा है। आरएलडी के गढ़ में जाटों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए भाजपा ने भूपेंद्र सिंह और उदयभान सिंह जैसे अपने पुराने नेताओं को सम्मान दिया है। वहीं अनिल राजभर को कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रमोशन देकर राजभर समाज को अच्छा संदेश देने की कोशिश की है।

इस मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) के नेता और अपना दल अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति आशीष पटेल को भी जगह मिलने की चर्चाएं थीं लेकिन ऐसा हुआ नहीं। माना जा रहा है कि सहयोगी दलों से मिले कड़वे अनुभव की वजह से भाजपा ने अपने ही नेताओं को आगे बढ़ा कर संतुलन करने की कोशिश की है। इसी कड़ी में अनुप्रिया पटेल के संसदीय क्षेत्र मिर्जापुर के मड़िहान विधानसभा क्षेत्र से रमाशंकर पटेल को मंत्री बनाया। चर्चाओं के मुताबिक भाजपा ने रमाशंकर पटेल को मंत्री बनाकर अनुप्रिया पटेल व आशीष पटेल को सख्त संकेत दिया है कि पार्टी अब किसी दबाव में नहीं आएगी। इन नेताओं की तरफ से अभी इस बारे में कोई बयान सामने नहीं आया है।