मजदूर से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर, जानिए कौन हैं अजय कुमार लल्लू

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उत्तर प्रदेश कांग्रेस में आज 11 अक्टूबर से एक नए युग की शुरूआत हो रही है। राज्य कांग्रेस की कमान अजय कुमार लल्लू को सौंप दी गई है। आइए जानते हैं कि कौन हैं अजय कुमार लल्लू और क्या वह राज्य में कांग्रेस की लगभग डूब चुकी नैया को पार लगा पाएंगे?


आमतौर पर बड़े चेहरों तक ही सीमित रहने वाली कांग्रेस पार्टी ने इस बार यूपी में एक आम चेहरे और जमीनी नेता की छवि रखने वाले अजय कुमार लल्लू को अध्यक्ष पद सौंपा है। अजय कुमार लल्लू ने शपथ ग्रहण के लिए गोरखपुर से लखनऊ जाने के लिए यूपी परिवहन निगम की बस को चुना और संदेश दिया कि वह कितने साधारण हैं। अजय कुमार लल्लू के जरिए कांग्रेस ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। अजय कुमार लल्लू पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं और दूसरे वह पिछड़ो में बनिया-कानू जाति से आते हैं। वह सामाजिक न्याय के मुद्दे पर मुखर रहे हैं, जुझारू हैं और यूपी में हर मसले को उठाने को लेकर तत्पर रहते हैं। कांग्रेस ओबीसी वोटों के साथ ही पूर्वी यूपी में पैर जमाने की कोशिश में है जिसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है।


अजय कुमार लल्लू कांग्रेस के पूर्वी यूपी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं, वह राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों के ही बेहद करीबी माने जाते हैं। प्रियंका गांधी के हर यूपी दौरे में वह साथ नजर आते हैं। उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने में प्रियंका और राहुल की ही अहम भूमिका बताई जा रही है। पिछले दिनों सोनभद्र हत्याकांड के बाद जब प्रियंका गांधी को मिर्जापुर के चुनार गेस्ट हाउस में रोक दिया था, तो अजय लल्लू ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर प्रियंका के नेतृत्व में वहां रात भर धरना दिया। अगले दिन जाकर प्रियंका ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी।


11 अप्रैल 1979 को कुशीनगर जिले में जन्मे अजय कुमार लल्लू का राजनीतिक सफर छात्र संघ से लेकर विधानसभा तक का रहा है। राजनीति विज्ञान से पोस्ट ग्रेजुएट अजय लल्लू 2007 में किसी भी पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय ही चुनाव लड़े लेकिन उस चुनाव में उनकी जमानत जब्त हो गई थी। चुनाव के बाद उनके परिवार को आर्थिक संकट से भी गुजरना पड़ा। हालात इतने बदतर हो गए कि मजदूरी तक करनी पड़ी। उन्होंने साथी मजदूरों के साथ सरिया उठाया, कंधे पर ईंट-पत्थर भी ढोए, लेकिन इस दौरान भी वह लोगों से लगातार संपर्क में रहे।


हालात कुछ सुधरे तो उन्होंने कुशीनगर के तुमकुहीराज में ही रहकर जनता की समस्याओं के लिए आवाज उठाई, धरना दिया और कई बार जेल भी दिए। इस वजह से लोग उन्हें धरना कुमार भी कहने लगे। इसके बाद 2012 में उन्हें कांग्रेस से टिकट मिला और उन्होंने तुमकुहीराज से भाजपा उम्मीदवार नंद किशोर मिश्रा को 5 हजार से अधिक वोटों से हराकर जीत हासिल की। 2017 में वह भाजपा की प्रचंड लहर में भी दोबारा जीते और कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता चुने गए।


यूपी कांग्रेस के नए अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की प्राथमिकता 2022 के विधानसभा चुनाव हैं। उनका कहना है कि वह अपने कार्यकाल में संपर्क, संवाद और संघर्ष पर काम करेंगे और कांग्रेस को मिशन 2022 के लिए तैयार करने में पूरी जी-जान लगा देंगे। यूपी कांग्रेस में गुटबाजी और अंसतुष्ट आवाजों पर उनका कहना था कि मतभेद हर पार्टी में होते हैं लेकिन हमारी कांग्रेस का प्रत्येक सदस्य गांधी के विचारों को मानता है और उस जगह पर जाकर हम सब एक हो जाते हैं। सभी गांधी को मानने वाले हैं। सबकी राय भी एक है। हम राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में और उनकी दिशा में काम करेंगे।