रघुवंश प्रसाद सिंह पड़े भारी, तेजस्वी को बदलना पड़ा फैसला

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बिहार में आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफे ने तेजस्वी यादव को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह की नाराजगी को देखते हुए तेजस्वी यादव ने अपना फैसला बदल लिया है और बाहुबली नेता रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह की आरजेडी में एंट्री पर रोक लगा दी है। पिछले हफ्ते ही रामा सिंह के आरजेडी में शामिल होने की खबर आने के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

जिस दिन रघुवंश प्रसाद का इस्तीफा हुआ था उससे पहले ही आरजेडी के पांच एमएलसी ने भी पार्टी छोड़ दी थी। ऐसे में चुनावों से ऐन पहले इन अटकलों ने जोर पकड़ लिया था कि क्या लालू की गैरमौजूदगी में चुनाव से पहले आरजेडी बिखर जाएगी?

रघुवंश प्रसाद सिंह आरजेडी के पुराने नेता हैं और लालू प्रसाद यादव के करीबी भी हैं। लालू अपने भरोसेमंद नेता की अहमियत और सामाजिक समीकरणों को अच्छी तरह से समझते हैं। वह चुनावों से पहले रघुवंश की नाराजगी मोल नहीं ले सकते। माना जा रहा है कि लालू के कहने पर ही तेजस्वी यादव ने अपने फैसले को बदल लिया है।

रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) छोड़ कर आरजेडी में शामिल होने को तैयार थे। वह सोमवार को आरजेडी की सदस्यता ग्रहण करनेवाले थे, हालांकि, आनन-फानन में कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है। हालांकि रामा सिंह ने कहा है कि आरजेडी की ओर से जब भी बुलावा आयेगा, मैं पार्टी ज्वाइन कर लूंगा।

रामा सिंह 5 बार विधायक रहे हैं और 2014 में वह राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी से वैशाली से सांसद चुने गए। इस चुनाव में उन्होंने आरजेडी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया था। इसी हार के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह, रामा सिंह का नाम तक नहीं सुनना चाहते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने जयचंद वैद अपहरण कांड को आधार बना कर पटना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी।