लॉकडाउन के 40 दिन, तेजस्वी से जानिए सीएम नीतीश पास या फेल?

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बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने लॉकडाउन के 40 दिनों में नीतीश सरकार के कामकाज का विश्लेषण करते हुए उन पर जोरदार हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि ‘बिहार सरकार के लॉकडाउन के दौरान विगत 40 दिनों के क्रियाकलापों का आँकलन करें तो बिहार के माननीय मुख्यमंत्री जी प्रशासनिक क्षमता, संवाद, संवेदना, दूरदर्शिता आदि पैमानों पर पूरी तरह से विफ़ल नज़र आये’।

बताते चलें कि देश में लॉकडाउन की शुरुआत 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के साथ हुई थी और उसके ठीक दो दिन बाद यानी 24 मार्च को 21 दिनों के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गई। इस दौरान लोगों का घर से बाहर निकलना वर्जित हो गया। रेल और हवाई सेवाएं बंद कर दी गई। सफर के सभी तरह के साधनों पर पाबंदी लगा दी गई है। गृह मंत्रालय अब लॉकडाउन 3.0 का ऐलान कर चुका है जो कि चार मई से प्रभावी होगा और 17 मई तक रहेगा।

तो हम बात कर रहे थे बिहार में लॉकडाउन में बीते 40 दिनों की जिनके बारे में चर्चा करते हुए तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के लिए कहा है कि ‘ख़ुद की माँग, ख़ुद ही खंडन, ख़ुद का आग्रह, ख़ुद ही हाथ खड़े कर देना। कभी ट्रेन बंद करवाने का आग्रह करते है। कभी मज़दूरों की वापसी का कड़ा विरोध करते है। उन्हें बिहार में घुसने नहीं देंगे जैसी धमकी देते है। फिर जब अधिकांश राज्य सरकारें अपने प्रदेशवासियों को वापस बुलाना शुरू करती है तो उसका नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते है। जब नियमों में संशोधन होता है तो कहते है हमारी 15 सालों की सुशासनी सरकार के पास संसाधन नहीं है। फिर अपनी ही ट्रेन बंद करवाने के आग्रह से पलट ट्रेन शुरू करवाने का आग्रह करते है। ट्रेन शुरू होती है तो फिर कहीं कोई व्यवस्था नहीं।

तेजस्वी यहीं नहीं रुके हैं। उन्होंने कहा है कि हमने 30 मार्च को ही सभी अप्रवासी श्रमवीरों को विशेष रेलगाड़ियों द्वारा वापस बुलाने की माँग की थी। उस वक्त जो भी मज़दूर वापस लौटे थे उनमें कोई भी कोरोना पॉज़िटिव नहीं था। लेकिन हमारी बात को बचकाना कह कर ख़ारिज कर दिया। फिर दूसरा लॉकडाउन शुरू हुआ तब 15 अप्रैल को हमने बारंबार ट्रेन चलाने का विशेष आग्रह किया लेकिन फिर हमारा मज़ाक़ उड़ाया गया।

हमने बाद में 2000 बसें देने का भी ऑफ़र किया। लगातार टेस्टिंग और स्वास्थ्य सुरक्षा और उपचार संबंधित उपकरणों की अनुउपलब्धता पर भी हम वास्तविक जानकारी, सलाह और सुझाव देते रहे लेकिन अहंकारी और अदूरदर्शी सरकार ने नहीं सुना। इनका एक सूत्री अजेंडा हमारे सकारात्मक सुझावों के विपरीत जाना रहा। हमने जो-जो महीने पहले कहा वो सरकार को अब करना पड़ रहा है।

तेजस्वी के नीतीश सरकार पर ये आरोप बेहद गंभीर हैं। जेडीयू की तरफ से तेजस्वी को जवाब भी दिया गया है। जेडीयू के प्रवक्ता निखिल मंडल ने तेजस्वी पर हमला बोलते हुए कहा है कि ‘पहली बात ट्रेन और विशेष ट्रेन में फर्क होता है पर आपको अंतर नही समझ आएगा ये लाजमी है. दूसरी बात आप और सकारात्मक सुझाव.!! हा हा हा अच्छा मजाक किया आपने.हम समय के मांग के हिसाब से चलते है आपकी तरह नही 1990 में भी घोटाला और 2020 में भी घोटाला…वैसे दिल्ली में मस्त है न,मजे कीजिए…

बहरहाल इसबीच अच्छी खबर यह है कि विवादों के उपरांत ही सही दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों और छात्रों का राज्य में आना शुरू हो गया है। राजनीति तो अपनी जगह चलती रहेगी लेकिन हम सभी को इन प्रवासियों का स्वागत करना चाहिए जिनके इतने दिन मानसिक परेशानी में बीते हैं।