सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में रैगिंग के मामले में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया सख्त, पूछा क्यों न लगाएं जुर्माना

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इटावा, सैफई में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में रैगिंग की घटना को दो दिन तक नकारने के बाद आखिकार यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सच्चाई मान ली है। विश्वविद्यालय की एंटी रैगिंग कमेटी की गुरुवार देर शाम कुलपति प्रो. राजकुमार को मिली रिपोर्ट में 2018 बैच के सात छात्रों को दोषी माना है। इससे पहले कुलपति राजकुमार लगातार रैगिंग की घटना को नकारते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने बेहद गैरजिम्मेदाराना बयान देते हुए पीड़ित छात्रों के सिर मुंड़ाने की घटना को संस्कार से जोड़ दिया था।

रैगिंग के मामले को दो दिन से दबाने की कोशिशें तब नाकाम हो गईं जब इटावा के डीएम जे बी सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय को दोषी मानते हुए रैगिंग होने संबंधी रिपोर्ट चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव को रिपोर्ट भेज दी। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रैगिंग की बात कूर ली और यहां की एंटी रैगिंग कमेटी ने कुलपति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सात छात्रों को दोषी मानते हुए उनपर 25 हजार रुपये का अर्थदंड और एक महीने हॉस्टल और कक्षाओं से बाहर रखने का प्रस्ताव किया। दोषी छात्रों के खिलाफ एफआईआर की भी तैयारी है।

उधर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) ने भी सैफई यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे में जवाब मांगा है और पूछा है कि क्यों न प्रति छात्र एक लाख का जुर्माना लगाते हुए यूनिवर्सिटी पर 1.50 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला जाए और दोषी छात्रों को एक माह के लिए निलंबित कर दें? एमसीआई इस मामले में कुलपति प्रो.राजकुमार के गैरजिम्मेदाराना बयानों से भी बेहर नाराज है।


सैफई यूनिवर्सिटी में करीब 150 छात्रों के सिर मुंड़ाने, उन्हें कतार में चलने और सीनियर छात्रों को देख कर सलाम ठोकने के वीडियो तक वायरल हो गए थे, लेकिन कुलपति राजकुमार इसे विश्वविद्यालय की परंपरा और छात्रों का संस्कार बताते रहे। हालांकि बोलती तस्वीरों से सच को झुठलाना मुश्किल होता गया तब डीएम जेबी सिंह ने एसडीएम सत्यप्रकाश मिश्रा और सैफई सीओ मस्सा सिंह की कमेटी से जांच कराई, इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन दोषी निकला। खबरें हैं कि डीएम ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में लापरवाही बरती और इसे छुपाने का प्रयास किया। विश्ववद्यालय की एंटी रैगिंग सेल ने कोई कार्रवाई नहीं की।

सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में हर साल 200 नए छात्र दाखिला लेते हैं। इस मामले में छात्रों ने खुलकर शिकायत नहीं की है, आमतौर पर रैगिंग के मामलों में देखने में यही आता है कि छात्र अपनी जुबान नहीं खोलते, क्योंकि उन्हें यही पढ़ना है। उन पर सीनियर्स का भारी दबाव होता है। हैरानी है कि कुपति जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए प्रो.राजकुमार यह सब जानते हुए भी डेढ़ सौ छात्रों के सिर मुड़वाने की घटना को रैगिंग नहीं मानते रहे। बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने रैगिंग को गैरकानूनी करार दिया है।