सुप्रीम कोर्ट ने BCCI चीफ अनुराग ठाकुर को प्रेसिडेंट पद से हटाया

20
SHARE
बीसीसीआई प्रेसिडेंट अनुराग ठाकर को सुप्रीम कोर्ट ने उनके पद से हटा दिया कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि अगर यह आरोप साबित हुआ तो उनके पास जेल जाने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।अनुराग पर कोर्ट में झूठा हलफनामा दायर करने का आरोप है। बीसीसीआई लोढ़ा पैनल की कुछ सिफारिशें लागू करने से इनकार कर दिया था। बीसीसीआई सचिव अजय शिर्के को भी हटाने के आदेश दिए|
एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में बोर्ड के एक सीनियर अफसर ने कहा, “हम किसी भी फैसले का सामना करने को तैयार हैं, लेकिन (ऑब्जर्वर के लिए) कोई नाम नहीं सुझाने वाले।’
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच केंद्र में होम सेक्रेटरी रहे जीके पिल्लई को कुछ वक्त के लिए ऑब्जर्वर अप्वॉइंट कर सकती है।लोढ़ा कमेटी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में पिल्लई को ऑब्जर्वर अप्वॉइंट करने का सुझाव दिया है।
15 दिसंबर को हुई सुनवाई में एमिकस क्यूरे गोपाल सुब्रमण्यम ने ऑब्जर्वर के तौर पर जीके पिल्लई, कैग की पोस्ट पर रहे विनोद राय और फॉर्मर टेस्ट क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ का नाम सुझाया था।बीसीसीआई के वकील कपिल सिब्बल ने पिल्लई के नाम पर विरोध दर्ज कराया था, लेकिन जस्टिस ठाकुर के पूछने पर भी इसकी वजह नहीं बताई थी।सिब्बल ने इस पर सोचने के लिए एक हफ्ते का वक्त मांगा था|
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमणियम की दलीलें सुनने के बाद पहली नजर में अनुराग को इसका दोषी पाया था।कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से पूछा था कि अनुराग ने इस मामले में झूठ बोला है या नहीं।सुब्रमणियम ने अपने जवाब में कहा- बीसीसीआई प्रेसिडेंट ने झूठ बोला है|
अनुराग पर पहले आरोप लगा था कि उन्होंने आईसीसी चेयरमैन शशांक मनोहर को एक लेटर लिखने के लिए कहा था, जिसमें यह कहा जाए कि बीसीसीआई में CAG अप्वॉइंट करना सरकारी दखल की तरह है।पिछले दिनों आईसीसी सीईओ डेव रिचर्डसन ने मीडिया से बातचीत में अनुराग पर यह आरोप लगाया था।सुप्रीम कोर्ट ने ठाकुर से इस पर हलफनामा पेश कर अपना पक्ष रखने को कहा था।हलफनामे में अनुराग ने इन आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि उन्होंने आईसीसी चेयरमैन शशांक मनोहर से सिर्फ यह कहा था कि इस मामले पर उनका स्टैंड क्या होता अगर वे (मनोहर) बीसीसीआई प्रेसिडेंट होते|
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, “अभिव्यक्ति की आजादी आपको कोर्ट के फैसले से असहमत होने का अधिकार देती है, उसको लागू होने से रोकने का अधिकार आपके पास नहीं है।एक बार हमने (झूठी गवाही के मामले में) फैसला सुना दिया तो आपके पास जेल जाने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं बचेगा|”
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर मंगलवार को रिटायर हो रहे हैं। पिछली सुनवाई में जस्टिस ठाकुर ने बीसीसीआई प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर से कहा था कि कोर्ट उनके खिलाफ बगैर नोटिस दिए आगे की कार्रवाई कर सकता है|