भाजपा ने सुभासपा से झाड़ा पल्ला, घोसी से इस राजभर नेता को उतारा, अब आगे क्या?

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उत्तर प्रदेश में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ सीट बंटवारे को लेकर काफी दिनों के असमंजस के बाद भाजपा ने घोसी लोकसभा सीट पर अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने यहां से फिर अपने सांसद हरिनारायण राजभर को प्रत्याशी बनाया है। इसके साथ ही अब उत्तर प्रदेश में सभी 80 सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई है।

विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल (एस) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इसी वजह से सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर लोकसभा चुनाव में भाजपा से सीट मिलने की उम्मीद कर रहे थे। भाजपा ने अपना दल को पिछले चुनाव की तरह ही दो सीटें मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज दे दीं लेकिन सुभासपा इंतजार करती रही।

पिछले हफ्ते ओमप्रकाश राजभर ने खुलासा किया कि भाजपा उन्हें घोसी सीट दे रही है लेकिन अपने सिंबल पर लड़ाना चाहती है, लेकिन यह उन्हें मंजूर नहीं था। राजभर ने भाजपा पर अपनी पार्टी को खत्म करने की कोशिश का आरोप लगाया और चुनाव के पांचवें, छठे और सातवें चरण के लिए अपनी पार्टी के 39 प्रत्याशियों की लिस्ट भी जारी कर दी।

सुभासपा की लिस्ट जारी होने के बाद भी घोसी से बीजेपी ने कोई प्रत्याशी नहीं घोषित किया था तो असमंजस की स्थिति बनने लगी थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने कुछ दिनों पहले कहा था कि उन्हें सुभासपा से अभी भी उम्मीदें थीं। हालांकि अब लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा और सुभासपा में सारे संबंध खत्म हो गए हैं, बावजूद इसके कि राज सरकार में सुभासपा अब भी सहयोगी दल के तौर पर शामिल है।

घोसी में अब भाजपा प्रत्याशी हरिनारायण राजभर का मुकाबला सपा-बसपा गठबंधन की ओर से बसपा के प्रत्याशी अतुल राय, कांग्रेस के प्रत्याशी बालकृष्ण चौहान और सुभासपा के महेंद्र राजभर से होगा।

हरिनारायण राजभर जनसंघ के जमाने से ही सक्रिय राजनीति में हैं। बलिया के सियर विधानसभा क्षेत्र  अब बेल्थरा रोड से वह 1991 और 1996 में दो बार भाजपा से विधायक बने। कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह के कार्यकाल में हरिनारायन राजभर को मंत्री भी बनाया गया। 2014 में घोसी लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया और पहली बार यहां भाजपा को जीत मिली।

सुभासपा के महेंद्र राजभर को अपना उम्मीदवार बनाने से राजभर वोटों में बंटवारा पक्का है, देखना होगा कि हरिनारायण राजभर दूसरी बार भी यहां से चुने जाते हैं या फिर ओम प्रकाश राजभर उनका रास्ता रोक देंगे। लोकसभा चुनाव में रिश्ता खत्म हो जाने से अब भविष्य में दोनों दलों के संबंधों पर भी सवालिया निशान लग गया है कि यह कब तक साथ चलेंगे?