मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की राष्ट्रीय अध्यक्ष की वैधता अभी संदेह के घेरे में है

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की राष्ट्रीय अध्यक्ष की वैधता अभी संदेह के घेरे में है कल जनेश्वर मिश्र पार्क में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन उसकी वैधता अभी संदेह के घेरे में है। फिलहाल तो मुलायम सिंह यादव ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

संविधान विशेषज्ञों की राय है कि राम गोपाल के इस पत्र पर चुनाव आयोग मुलायम सिंह यादव को नोटिस जारी कर उनसे अपना पक्ष रखने के लिए कह सकता है।

राज्यपाल के पूर्व विधि सलाहकार चन्द्र भूषण पाण्डेय के अनुसार अगर कोई यह दावा कर रहा है कि अब हम पार्टी के नए अध्यक्ष बन गए हैं तो चुनाव आयोग मौजूदा पुराने अध्यक्ष से तो पूछेगा ही। राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से भी पूछेगा कि वह बताएं कि यह अधिवेशन कब हुआ। देश या प्रदेश में कोई भी पार्टी जब बनती है तो उसके सारे दस्तावेज अध्यक्ष की तरफ से ही चुनाव आयोग में भेजे जाते हैं|

श्री पाण्डेय ने बताया कि अगर पार्टी दो फोड़ होती है तो दूसरे धड़े को चुनाव आयोग के समक्ष यह साबित करना पड़ेगा कि नए अध्यक्ष का चुनाव किस प्रक्रिया के तहत, किन-किन लोगों की सहमति से हुआ। इसी तरह चुनाव के लिए प्रत्याशियों को पार्टी के चुनाव चिन्ह आवंटित करने के अधिकार की जहां तक बात है तो यह प्रक्रिया हर चुनाव में अपनाई जाती है|

अब प्रदेश विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होगी तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव आयोग को यह लिखकर देंगे कि उन्होंने किसको पार्टी के चुनाव चिन्ह प्रत्याशियों को आवंटित करने के लिए फार्म-ए और बी पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया है। वैसे समाजवादी पार्टी के संविधान में लिखा है कि अध्यक्ष ही प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा। उन्होंने कहा कि अब अगर अखिलेश यादव चुनाव आयोग से एक पृथक पार्टी के पंजीकरण की फारियाद करते हैं तो चुनाव आयोग गौर भी कर सकता है|