मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव अलग-अलग लड़ेंगे चुनाव : सूत्र

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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच सुलह कराने की कोशिशें लगभग नाकाम हो गई हैं| लखनऊ में समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है| पार्टी के वरिष्ठ नेता और सरकार में मंत्री आजम खान यह कोशिशें कर रहे थे| अब पार्टी के सूत्रों का कहना है कि दोनों ही दल चुनाव में अलग-अलग उतरेगा| यानी यह साफ है कि पार्टी में दो फाड़ हो गया है|

कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव द्वारा पेश की गई शर्तों को मुलायम सिंह यादव खेमा मानने को तैयार नहीं हुआ है| यहां तक कि दोनों खेमा अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे| मुलायम सिंह यादव का मानना है कि अखिलेश की शर्तों को मानने का मतलब है कि पार्टी में उनकी कोई भूमिका नहीं रह जाएगी| उधर, पार्टी सूत्रों का कहना है कि आजम खान ने अभी भी हार नहीं मानी है, वे दोनों को मनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं|

इससे पहले आज शिवपाल यादव और आजम खान ने मुलायम सिंह यादव से उनके घर जाकर मुलाकात की| मंगलवार को दिन में और फिर रात लखनऊ में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की बातचीत हुई जो बेनतीजा रही थी| इसमें कोई फॉर्मुला नहीं निकल सका था| मुलायम और अखिलेश की इस बैठक में चाचा शिवपाल भी मौजूद थे| इस बीच रामगोपाल यादव ने दिल्ली में चुनाव आयोग के साथ बैठक के बाद कहा कि कोई समझौता होने नहीं जा रहा| हम अखिलेश यादव की अध्यक्षता में चुनाव लड़ने जा रहे हैं|

मुलायम सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष रहें|अमर सिंह पार्टी के बाहर रहे| शिवपाल को केंद्र की राजनीति में भेजा जाए| शिवपाल यूपी की सियासत में दखल ना दें|अखिलेश पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनें| रामगोपाल यादव को टिकट बांटने का अधिकार मिले|

चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद आज रामगोपाल यादव ने कहा है कि 90 फीसदी विधायक अखिलेश यादव का समर्थन कर रहे हैं इसलिए उनके गुट को ही समाजवादी पार्टी माना जाना चाहिए| रामगोपाल ने यह भी कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न भी उनके गुट को ही मिलना चाहिए| इससे पहले सोमवार को मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव, अमर सिंह और जया प्रदा चुनाव आयोग पहुंचे थे और अपना पक्ष रखा था|

साइकिल का हैंडल कौन थामेगा अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है हालांकि यह भी सही है कि इस तरह के मामलों में फैसले के लिए कई महीनों का वक्त चाहिए| ऐसे में साइकिल जब्त हो सकती है| इसका अहसास दोनों खेमों को है, लेकिन हथियार डालने को कोई तैयार नहीं|

चुनाव आयोग के मुताबिक वह दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद ही फैसला करेगा, जिसकी सुनवाई कोई सदस्य नहीं बल्कि पूरा कमीशन करेगा, लेकिन इसमें कुछ महीनों का वक्त लग सकता है| पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के मुताबिक, इस तरह के मामलों में फैसला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक दिए जाते हैं| देखा जाएगा कि बहुमत किसके साथ है| फैसला नहीं होने पर चुनाव चिन्ह फ्रीज हो जाएगा| दोनों पक्षों को अस्थायी चुनाव चिह्न मिलेगा| दोनों पार्टियां भी अस्थायी चिह्न चुन सकती हैं|