उपेंद्र कुशवाहा ने मंत्री पद छोड़ा, एनडीए से नाता तोड़ा, अब नीतीश और बीजेपी से करेंगे दो-दो हाथ

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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने आज 10 दिसंबर को आखिरकार एनडीए से नाता तोड़ लिया और केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी दे दिया। एनडीए से अलग होने के बाद कुशवाहा ने पीएम नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि पीएम मोदी से जो उम्मीदें थीं उन पर वह खरे नहीं उतरे।

उपेंद्र कुशवाहा का कहना था कि पीएम ने बिहार को विशेष पैकेज देने की घोषणा की थी लेकिन कुछ नहीं मिला। बिहार आज भी वहीं खड़ा है जहां पहले खड़ा था। राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। कुशवाहा ने कहा कि ‘ओबीसी के लोग निराश हुए हैं। ओबीसी वर्ग आज ठगा हुआ महसूस कर रहा है। पीएम मोदी ने ओबीसी के कमजोर तबके के वर्गीकरण की बात कही थी लेकिन उसे भी कमेटी बनाकर टाल दिया गया।

कुशवाहा ने मोदी सरकार पर आरएसएस के एजेंडे को लागू करने का भी आरोप लगाया और कहा कि सबकुछ समझने के बाद मुझे लगता है कि आरएसएस के एजेंडे को लागू करने के लिए मुझे कैबिनेट में एक मिनट के लिए भी नहीं रुकना चाहिए।

उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की नीतीश सरकार पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के राज में बिहार में घोर अन्याय हुआ है। राज्य सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार का एजेंडा उन्हें बर्बाद करने का था। नीतीश की तरफ से नुकसान पहुंचाने का प्रयास होता रहा। बीजेपी ने भी हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

अपनी अगली सियासी रणनीति के बारे में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि सभी विकल्प खुले हैं, इसमें अकेले लड़ने या फिर महागठबंधन में जाने का विकल्प भी है। इस बीच कांग्रेस ने कुशवाहा को महागठबंधन में आने का न्योता दिया है, देखना होगा कि कुशवाहा इस बारे में कब तक फैसला लेते हैं।