यूपी ATS ने देशभर से ISI के 11 एजेंट गिरफ्तार करने का दावा किया

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उत्तर प्रदेश एटीएस टीम ने 11 एजेंटों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। उत्तर प्रदेश में सेना की सूचनाओं की जासूसी करने के साथ अतंरराष्ट्रीय फोन कॉल कराने वाले रैकेट का आज उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने राजफाश किया। एटीएस ने सेना, पुलिस और दूरसंचार विभाग के टर्म सेल की मदद से अंतराष्ट्रीय फोन काल कराने वाले रैकेट के सरगना समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एटीएस का दावा है कि यह एजेंट सिम बॉक्स के जरिये सेना की खूफिया जानकारी इंटरनेट कॉल के जरिये लेकर पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को देते थे|

यह गिरफ्तारी लखनऊ, हरदोई, सीतापुर और नई दिल्ली के महरौली से की गयी है। एटीएस टीम ने 18 से अधिक सिम बाक्स समेत अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं। डीजीपी जावीद अहमद इस टीम को पुरस्कृत करेंगे। एटीएस मुख्यालय पर एटीएस के आइजी असीम अरुण ने बताया कि गोपनीय सूचना के आधार पर एटीएस टीम ने लखनऊ के अलीगंज के सेक्टर जे में रहने वाले राहुल रस्तोगी, मडिय़ांव के शिवेन्द्र मिश्रा, अमीनाबाद के हर्षित गुप्ता, राजाजीपुरम निवासी विशाल कक्कड़ और प्रियदर्शनी कालोनी में रहने वाले बुलंदशहर निवासी राहुल सिंह को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तीन लैपटाप, 12 सिम बाक्स, 87 सिम, 25 मोबाइल फोन, डाटा कार्ड और अन्य सामग्री बरामद की है|

हरदोई के सरायथोक पश्चिम निवासी विनीत कुमार दीक्षित के कब्जे से दो सिम बाक्स, 16 एवं 32 स्लाट के, 13 सिमकार्ड, दो लैपटाप, दो पेन ड्राइव और चार मोबाइल फोन बरामद किए। सीतापुर से चर्च रोड निवासी रिषी होरा, सुक्खूमल रोड के श्याम बाबू, शमशेर बाग कालोनी के उत्तम शुक्ला व सिविल लाइन निवासी विकास वर्मा को 16 स्लाट्स के दो सिम बाक्स और अन्य उपकरण बरामद किए हैं|

इन अभियुक्तों से पूछताछ के बाद एटीएस के एएसपी राजेश साहनी के नेतृत्व में दिल्ली के महरौली में छापामारी कर सरगना गुलशन सेन को भी दबोच लिया गया। गुलशन सेन ने एटीएस टीम को कई अहम सुराग दिए हैं|

अंतराष्ट्रीय स्तर पर काल रैकेट चलाने वाले इस गिरोह के तार पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब और दुबई से जुड़े हैं। इनके लोग सैन्य अधिकारी बनकर जम्मू-कश्मीर में सेना की जासूसी का प्रयास कर रहे थे। एक दिन कर्नल विक्रम तिवारी नाम से एक फोन पर सेना का मूवमेंट पूछा गया तो इंटेलीजेंस एजेंसी के कान खड़े हो गये। फोन करने वाले का नंबर उत्तर प्रदेश का था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर की मिलिट्री इंटेलीजेंस यूनिट ने एटीएस से यह जानकारी साझा की। एटीएस उत्तर प्रदेश ने इन नंबरों की जांच की पाया कि अवैध टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए भारत के बाहर से काल किये जा रहे हैं परंतु डिस्प्ले पर भारत का ही नंबर दिखता है। आइजी असीम अरुण ने बताया कि अब इस रैकेट का राजफाश होने से जासूसी कर रहे एजेंटों का काम मुश्किल हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय फोन गेटवे से बचकर अब काल नहीं कर पाएंगे। इसके लिए सेना और टर्म सेल के साथ मिलकर अन्य आपरेटरों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। इससे आतंकवादियों और जासूसों का काम मुश्किल तो होगा ही, सरकार और मोबाइल कंपनियों को हो रही करोड़ों की हानि भी बचेगी। प्रति मिनट काल पर ये भारत सरकार को 53 पैसे राजस्व की क्षति पहुंचा रहे थे|

आइजी व टर्म सेल के अधिकारियों ने बताया कि विदेश से भारत में सस्ते फोन काल करने के लिए कुछ आपराधिक तत्व अवैध रूप से पैरलल टेलीफोन एक्सचेंज चला रहे हैं। इसके अन्तर्गत विदेश में बैठा व्यक्ति भारत को इंटरनेट काल करता है और सिम बाक्स के माध्यम से वायस काल में बदलकर (हिन्दुस्तान के जिन नंबर पर) विदेश में बैठा व्यक्ति बात करना चाहता है ये लोग बात करा देते हैं। स्क्रीन पर विदेशी नंबर की जगह हिन्दुस्तान का ही नंबर दिखता है। इस वजह से भारत की सुरक्षा को खतरा पहुंचने के साथ ही करोड़ों रुपये की भारतीय टेलीफोनिक अर्थव्यवस्था की चोरी होती है|

टर्म सेल के अधिकारी अशोक कुमार राघव का कहना है कि भारत में इंटरनेट से किसी भी मोबाइल या लैंडलाइन पर काल वैध नहीं है। जो भी काल होगी वह भारत सरकार के नियमों के शर्तों के अधीन होनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर कोई करीबी या रिश्तेदार विदेश में है और वहां से फोन करे और स्क्रीन पर भारतीय नंबर दिखे तो देशहित और सुरक्षा के लिए इसकी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने इसके लिए टोल फ्री नंबर- 1800110420 दिया है|

असीम अरुण के मुताबिक एटीएस की टीम ने गहनता से छानबीन में पाया कि लखनऊ, सीतापुर और हरदोई समेत कई जिलों में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चल रहे हैं। लखनऊ के गिरोह का ही संबंध इन सभी से है। इसी आधार पर कल देर रात तक छापेमारी कर गिरफ्तारी की गयी। इस सराहनीय कार्य में टर्म सेल के एके राघव, एटीएस के केएम राय, कृपाशंकर दीक्षित, विनोद शुक्ला, दिनेश शर्मा तथा सुरेश गिरी और संजय सिंह, भानुप्रताप सिंह ने एएसपी राजेश साहनी के नेतृत्व में यह उपलब्धि हासिल की|

काल रैकेट का सरगना गुलशन सेन मशहूर कोचिंग संस्था में अध्यापक है। वह इंटरनेट सर्विस प्रदाता का भी काम करता है। उसकी मेधा गलत दिशा में चली गयी और गुलशन ने ही बेरोजगार युवाओं को जोड़कर इस धंधे को परवान चढ़ाया। एक गरीब युवक को मोटर साइकिल और आवास उपलब्ध कराकर उसे इस धंधे से जोड़ दिया। वह अपने बाथरूम से इस धंधे को चला रहा था। आइजी असीम अरुण ने कहा कि अभी ऐसे बहुत से सदस्य हैं जिनका पता चल नहीं पाया है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे नेटवर्क का सफाया करेंगे|