अखिलेश यादव ने छुए चाचा शिवपाल सिंह यादव के पैर, क्या एक होंगे चाचा-भतीजा

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होली का मौका सभी मतभेद भुलाने का होता है और ऐसा ही कुछ होता दिखाई दिया समाजवादी पार्टी के गढ़ सैफई में। होली के मौके पर मुलायम सिंह यादव के इटावा स्थित पैतृक गांव सैफई में उनका पूरा परिवार एकजुट होता दिखाई दिया। सिर्फ इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव का पैर छूते दिखे तो शिवपाल अपने बड़े भाई राम गोपाल यादव का पैर छूते दिखे

समाजवादी पार्टी में चाचा-भतीजे का झगड़ा जगजाहिर है। विवाद इतना बढ़ा कि चाचा शिवपाल यादव ने अपनी नई पार्टी ही बना ली और अखिलेश यादव से किनारा कर लिया। अब लगभग चार साल बाद होली के मौके पर मुलायम सिंह यादव का यह परिवार एक बार फिर से इकट्ठा हुआ। मुलायम परिवार के चार बड़े नेता अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, राम गोपाल यादव और शिवपाल यादव, एक मंच पर आए थे, इनके अलावा धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप यादव भी मौजूद थे। सभी की मौजूदगी से ऐसा लगा कि सारे गिले-शिकवे दूर हो गए।

होली के लिए मंच सजा था, अखिलेश-मुलायम पहले ही आ चुके थे। मुलायम सिंह यादव का संबोधन हो चुका था और अखिलेश लोगों को होली की बधाइयां दे रहे थे, इसी बीच शिवपाल वहां पहुंचे। इस पर अखिलेश यादव ने आगे बढ़कर चाचा शिवपाल के पैर छू लिए तो समर्थकों ने भी नारा लगाया कि अखिलेश भइया, शिवपाला चाचा जिंदाबाद। इस दौरान खूब होली खेली गई और रंगों की जगह गुलाब और गेंदे के फूल बरसाए गए।

अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच विवाद साल 2016 में शुरू हुआ था। 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले इस विवाद ने समाजवादी पार्टी की खूब किरकिरी कराई। 2017 में अखिलेश यादव को सत्ता भी गंवानी पड़ी। मुलायम परिवार में दो खेमे बन गए। एक तरफ अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव तो दूसरी तरफ शिवपाल सिंह यादव। नाराजगी इतनी बढ़ती गई कि 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के नाम से अपनी पार्टी भी बना ली। शिवपाल की पार्टी ने लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन पार्टी का प्रदर्शन फीका रहा।

अब समाजवादी पार्टी के इन नेताओं के एक साथ एक मंच पर आने के सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। अभी तक अखिलेश और शिवपाल दोनों ही अड़े हुए दिखते रहे हैं लेकिन कुछ दिनों पहले ही शिवपाल कह चुके हैं कि गठबंधन के लिए समाजवादी पार्टी उनकी पहली पसंद होगी। अब ऐसे में जब अखिलेश यादव ने भी उनके पैर छुए तो माना जा रहा है कि आगामी पंचायत चुनावों और फिर उसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में चाचा-भतीजा फिर से एक हो सकते हैं।