दिल्ली में फिर चली अरविंद केजरीवाल की झाड़ू, भाजपा के दावे फेल, कांग्रेस फिर जीरो पर आउट

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दिल्ली विधानसभा चुनावों में एक बार फिर आम आदमी पार्टी का जादू चल गया है। अरविंद केजरीवाल, शीला दीक्षित के बाद दूसरे ऐसे शख्स होंगे जो लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेंगे। आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव में 70 में से 62 सीटों पर जीत मिली है। यह पिछली बार की तुलना में 5 कम है लेकिन यह जीत बहुत बड़ी है और किसी भी तरह इसे कमतर नहीं आंका जा सकता।


भाजपा अंतिम नतीजे आने तक बड़े दावे करती रही लेकिन आखिरकार उसके दावे हवाई ही साबित हुए। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने हार स्वीकार करते हुए अरविंद केजरीवाल को जीत की बधाई दी। उन्होंने माना कि जीत को लेकर किए जा रहे उनके अनुमान गलत साबित हुए। उन्होंने कहा कि हार की जिम्मेदारी वह लेते हैं।


भाजपा के तमाम दिग्गज अपना चुनाव हार गए। इनमें तेजिंदर पाल सिंह बग्गा, कपिल शर्मा जैसे नाम भी शामिल हैं जो सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहते हैं। सबकी निगाहें कपिल मिश्रा पर भी टिकी थीं क्योंकि वह आप के बागी थे और आप के खिलाफ वह काफी उग्र दिखाई देते रहे हैं। उन्होंने भी अपनी हार स्वीकार करते हुए अरविंद केजरीवाल को जीत की बधाई दी।


दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर से फिसड्डी साबित हुई है। कांग्रेस फिर से खाता नहीं खोल सकी और उसके उम्मीदवारों की ज्यादातर सीटों पर जमानत जब्त हो गई। आम आदमी पार्टी छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुई अलका लांबा 4 हजार वोट भी हासिल नहीं कर पाईं जबकि वह पिछला चुनाव चांदनी चौक विधानसभा सीट से ही आप के टिकट पर जीती थीं।


दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान शाहीन बाग और नागरिकता संशोधन कानून के मुद्दे छाए रहे लेकिन दिल्ली की जनता ने इनको नकारते हुए स्थानीय मुद्दों के आधार पर वोट दिया। इन चुनावों में आप ने बड़ी चतुराई से विवादित मुद्दों के किनारा करते हुए स्थानीय मुद्दों पर लोगों से वोट मांगे। केजरीवाल ने चुनावों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे को उठाया और जनता के बीच इसी आधार पर वोट मांगा। बीजेपी ने शाहीन बाग और CAA का मुद्दा जोर-शोर से उठाया लेकिन दिल्लीवालों ने इन्हें सिरे से नकार दिया। इसके साथ ही भाजपा चुनाव में केजरीवाल की टक्कर का नेता विपक्ष पेश नहीं कर पाई।