यूपी उप चुनाव में सपा सबसे ज्यादा फायदे में, अखिलेश गंभीरता दिखाते तो एक सीट और जीतते

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यूपी में 11 विधानसभा सीटों पर हुए उप चुनाव के नतीजे आ गए हैं। उप चुनाव में भाजपा ने अपने सहयोगी अपना दल एस के साथ 8 सीटें जीती हैं तो समाजवादी पार्टी के खाते में 3 सीटें आई हैं। नतीजों से साफ है कि इस उप चुनाव में सबसे ज्यादा कोई फायदे में रहा है तो वह हैं समाजवादी पार्टी और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव।

उप चुनाव के नतीजे आने से पहले यही माना जा रहा था कि समाजवादी पार्टी सिर्फ एक सीट वह भी रामपुर की सीट ही जीत पाएगी लेकिन नतीजे आए तो सपा तीन सीटें जीत गई और 4 सीटें पर दूसरे नंबर पर आई। पार्टी ने जैदपुर और जलालपुर की सीटें अप्रत्याशित रूप से जीत लीं। जैदपुर में तो सपा के गौरव कुमार शुरू से ही आगे चल रहे थे लेकिन जलालपुर में सपा के सुभाष राय दोपहर बाद लीड ले पाए और आखिरकार नतीजे भी उनके पक्ष में रहे।

सभी 11 सीटों में से भाजपा ने गंगोह, इगलास, लखनऊ कैंट, गोविंदनगर, मानिकपुर और बलहा विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की है वहीं उसकी सहयोगी अपना दल एस को प्रतापगढ़ सीट पर जीत मिली है। उधर समाजवादी पार्टी ने रामपुर, जैदपुर और जलालपुर की सीटें जीत ली हैं। इनमें से एक सीट घोसी भाजपा सिर्फ 1773 वोटों के अंतर से जीती है। यहां से सपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुधाकर सिंह दूसरे नंबर पर रहे। उन्होंने सपा के प्रत्याशी के तौर पर भी नामांकन दाखिल किया था लेकिन नामांकन पत्र में कुछ कमियों से उनका पर्चा खारिज हो गया था।

इस चुनाव में सबसे बुरा हाल बसपा का हुआ है। पार्टी लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद काफी जोश में थी और पार्टी सुप्रीमो मायावती ने पहली बार उप चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया था, लेकिन नतीजे पार्टी के पक्ष में नहीं रहे। सुबह के वक्त मतगणना के दौरान एक वक्त ऐसा भी था जब सपा के साथ-साथ बसपा भी दो सीटों पर आगे चल रही थी लेकिन शाम तक स्थिति बदल गई। बसपा इगलास और जलालपुर विधानसभा सीटों पर दूसरे नंबर पर रही।

कांग्रेस के लिए स्थिति अच्छी इसलिए कह सकते हैं क्योंकि पार्टी दो विधानसभा सीटों गंगोह और कानपुर की गोविंदनगर सीट पर दूसरे नंबर पर रही। गंगोह में तो दोपहर बाद तक पार्टी के प्रत्याशी पहले नंबर पर रहे लेकिन बाद में भाजपा के कीरत सिंह ने 5419 वोटों से विजयश्री हासिल की।  

बात फिर से समाजवादी पार्टी की करें तो सपा ने इन उप चुनावों को गंभीरता से भी नहीं लिया था। भाजपा जहां हर सीट पर जोर लगाए हुए । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने ढेरों रैलियां की वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रचार से दूरी बनाए रहे। वह प्रचार के आखिरी दिन सिर्फ रामपुर में आज़म खान की पत्नी तंजीन फातिमा के प्रचार के लिए गए।

अखिलेश यादव अगर अधिक सीटों पर प्रचार के लिए गए होते तो कुछ और सीटों पर स्थिति बदल सकती थी। घोसी सीट पर सपा उम्मीदवार के तौर पर पर्चा खारिज हो जाने के बाद सुधाकर सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े। अखिलेश उनका प्रचार करते या फिर इस सीट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन रहा होता तो यह सीट भी सपा के खाते में जा सकती थी।