इस साल का मॉनसून देश के लिए एक दोहरी चुनौती लेकर आया है। जहां राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में औसत से कहीं ज्यादा बारिश ने कहर बरपाया है, वहीं बिहार और पूर्वोत्तर के राज्यों में मॉनसून कमजोर रहा है, जिससे सूखे जैसी स्थिति पैदा हो रही है। इस लेख में जानें भारत के विभिन्न राज्यों में इस मॉनसून की क्या स्थिति रही।

इस साल का मॉनसून देश के कई हिस्सों में कहर बनकर टूटा है, जबकि कुछ राज्य बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, मॉनसून इस बार सामान्य से 8 दिन पहले, यानी 24 मई को ही केरल पहुँच गया था और 29 जून को इसने पूरे देश को कवर कर लिया था, जो सामान्य तिथि से 9 दिन पहले था।
इस मॉनसून सीजन में सबसे ज्यादा बारिश उन राज्यों में हुई है, जहाँ आमतौर पर इतनी बारिश नहीं होती। राजस्थान में अब तक 554 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से 56% अधिक है। इसी तरह, दिल्ली में 574 मिमी से अधिक बारिश हुई है, जो औसत से 38% ज्यादा है।
पहाड़ी राज्यों में भी स्थिति गंभीर रही। हिमाचल प्रदेश में 762 मिमी और उत्तराखंड में 1075 मिमी से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई, जो क्रमशः 30% और 15% अधिक है। लद्दाख में तो स्थिति और भी चौंकाने वाली है, जहाँ 64 मिमी बारिश औसत से 298% ज्यादा है। इसके अलावा, झारखंड, गुजरात, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी औसत से ज्यादा बारिश हुई है।
वहीं, दूसरी ओर कुछ राज्यों में मॉनसून ने निराश किया है। बिहार में 544 मिमी बारिश हुई है, जो औसत से 27% कम है। त्रिपुरा को छोड़कर, पूरे पूर्वोत्तर भारत में मॉनसून कमजोर रहा है। असम में 754 मिमी बारिश हुई है, जो औसत से 34% कम है। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और सिक्किम में भी बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है।
यह अनियमित बारिश का पैटर्न जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव की ओर इशारा करता है, जहाँ एक तरफ बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सूखे का खतरा मंडरा रहा है।