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संभल हिंसा की रिपोर्ट: दंगे के पीछे गहरी साजिश और जनसांख्यिकीय बदलाव की ओर इशारा

विवरण: संभल हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने अपनी 450 पृष्ठों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में दंगों के पीछे एक गहरी साजिश, क्षेत्र के जनसांख्यिकीय बदलाव और कट्टरपंथी संगठनों की भूमिका का जिक्र किया गया है।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले साल 24 नवंबर को हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने अपनी 450 पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

रिपोर्ट के कुछ कथित लीक हुए अंशों के अनुसार, यह सिर्फ एक सामान्य दंगा नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश थी। रिपोर्ट में शहर में हो रहे तेजी से जनसांख्यिकीय बदलावों पर चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ हिंदू आबादी घटकर लगभग 15-20% रह गई है, जो पहले 45% थी। इसके साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया है कि दंगों में कट्टरपंथी समूहों और बाहरी दंगाइयों की भूमिका थी।

आयोग के सदस्यों ने रिपोर्ट को ‘गोपनीय’ बताया है और इसके विवरण का खुलासा करने से इनकार किया है, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा के सदस्यों ने रिपोर्ट में कही गई बातों को पुष्ट किया है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि संभल में हुआ जनसांख्यिकीय परिवर्तन देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि दंगों में हिंदुओं को निशाना बनाया गया था, जिसके कारण उनका पलायन हुआ।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नवंबर 2024 के दंगों में दंगाइयों ने नरसंहार की कोशिश की थी, जिसे पुलिस ने सफलतापूर्वक रोका। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाबर की विरासत का हवाला देकर सांप्रदायिक माहौल को और भड़काया गया था। यह रिपोर्ट संभल के पुराने दंगों के इतिहास पर भी प्रकाश डालती है, जो 1953 से शुरू हुए थे।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट सिर्फ एक घटना की जांच नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों की जटिलता को उजागर करती है। यह रिपोर्ट अब कैबिनेट और विधानसभा में पेश की जाएगी।