लखनऊ. यूपी में एमएलसी चुनाव में भाजपा अपने पुराने प्रदर्शन को बचाने में कामयाब रही है लेकिन समाजवादी पार्टी ने अपना प्रदर्शन काफी सुधार लिया है। पिछली बार के 3 के मुकाबले 5 सीटें जीतने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को चारों तरफ से बधाइयां मिल रही हैं.
अखिलेश यादव को बधाई देने वालों में प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर भी शामिल हैं जो पिछले कई वर्षों से अखिलेश यादव पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ते रहे हैं। एमएलसी चुनाव में सपा की जीत पर ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘अखिलेश जी, एमएलसी चुनाव के नतीजों में आपकी पार्टी के प्रदर्शन की आपको बहुत बधाई।’
इसके बाद ओपी राजभर ने अखिलेश यादव के लिए सीधे कुछ नहीं लिखा, बल्कि सपा-कांग्रेस की दोस्ती पर तंज कसा है। वह अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखते हैं कि ‘ वैसे ये बताइए, अपने मित्र राहुल जी को बधाई दिए या नहीं? यूपी में तो कांग्रेस वालों को प्रत्याशी भी नहीं मिला, जहां मिला वहां रिजल्ट में आया “ज़ीरो”। यहां तक की कांग्रेस शासित कर्नाटक में लोगों ने आपके मित्र को दुत्कार दिया।
याद रखिएगा, कांग्रेस ख़ुद को आपका बड़ा भाई मानता है। 403 में से 200 से ज़्यादा उन्हें चाहिए। जब कांग्रेस वाले आपसे सीटें मांगें तो “ज़ीरो” तो याद दिला ही दीजिएगा, साथ ही पूछियेगा कि एमएलसी चुनाव में कोई कांग्रेस वाला सपा के प्रत्याशी को समर्थन देने के लिए एक दिन भी खड़ा हुआ?
पूछियेगा कांग्रेस से कि ये कैसा भाईचारा कि आप चुनाव लड़ रहे और आपका बड़ा भाई आपके साथ खड़ा होने नहीं आया। यानी हिस्सा चाहिए “आधा” और समर्थन देंगे “ज़ीरो”। बड़ी नाइंसाफी है महाराज। भाईचारा मुबारक!’
ओमप्रकाश राजभर ने इस पोस्ट में पूरी ईमानदारी से समाजवादी पार्टी की जीत को स्वीकार किया है। इससे पहले आए एक बयान में उन्होंने वाराणसी शिक्षक और स्नातक सीट के नतीजों पर कहा था कि यह पढ़े-लिखे लोगों का वोट है, आम जनता का नहीं, यह पढ़े-लिखे लोग आम चुनाव में घर में छुट्टी मनाना पसंद करते हैं, जबकि आम जनता वोट देने निकलती है। उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान का हवाला देते हुए कहा था कि भाजपा को चिंता नहीं बल्कि चिंतन करने की जरूरत है।
बताते चलें कि पिछला विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी और सुभासपा ने गठबंधन में लड़ा था, उनकी और अखिलेश यादव की जोड़ी को चाचा-भतीजे की जोड़ी कहा गया ता लेकिन नतीजों के बाद सुभासपा ने अपना रास्ता अलग करते हुए एनडीए का दामन थाम लिया था. इसके बाद से ही सुभासपा प्रमुख लगातार अखिलेश यादव पर निशाना साधते रहे हैं। संभवत: यह पहली बार है जब सपा पर कोई बयान देते समय उन्होंने अखिलेश यादव पर सीधा निशाना नहीं साधा है।















